सेवा ही परम धर्म है ।

ਸਮਾਜ ਸੇਵਾ ਹੀ ਸਭ ਤੋਂ ਉੱਤਮ ਸੇਵਾ - ਐਨ. ਐੱਸ. ਐੱਸ. ਵਲੰਟੀਅਰ    Prof. Shabeer ji  Prof. Grover ji And team  ਦੀਨਾਨਗਰ, 10 ਜਨਵਰੀ (ਸੰਜੀਵ ):-ਐੱਸ.ਐੱਸ. ਐੱਮ. ਕਾਲਜ ਦੀਨਾਨਗਰ ਵਿਖੇ ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਡਾ. : ਆਰ. ਕੇ.ਤੁਲੀ ਜੀ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਹੇਠ ਚੱਲ ਰਹੀ ਸੱਤ ਰੋਜ਼ਾ ਐਨ.ਐਸ…

SSM COLLEGE मैं मनाया गया स्वामी स्वतंत्रानंद जी का जन्मोत्सव।

NEWS WRITER               PROFESSOR - SABIR JEE SSM COLLEGE DINA NAGAR   एसएसएम कॉलेज दीनानगर में स्वामी सदानंद की अध्यक्षता एवं डॉक्टर आरके तुली के नेतृत्व में दयानंद मठ दीनानगर के संस्थापक लोह पुरुष, फील्ड मार्शल स्वामी स्वतंत्…

शहीद भगत सिंह

लेखक                                    हितेश ठाकुर शहीद भगत सिंह।    शहीद भगत सिंह बलिदान, तप, देशभक्ति, साहसी विचार और सद्‌गुणों वाले भारत माता …

वैदिक धर्म का परिचय

भाषा PDF डाउनलोड करें ध्यान रखें सम्पादित करें   वैदिक धर्म  से आशय उस  धर्म  से है जो  वैदिक काल  (अनुमानतः 1500 ईसापूर्व से 500 ईसापूर्व) में भारत के  भारतीय उपमहाद्वीप  के उत्तरी-पश्चिमी भाग (पंजाब तथा गंगा के मैदान का पश्चिमी…

किसकी स्तुति करें ?

प्रेष्ठ वो अतिथिं स्तुषे मित्रमिव प्रियम्। अग्रे रथं न  वेद्यम् ॥ - साम० ५ ऋषिः - मेधातिथिः ॥ देवता - अग्रिः ॥ छन्दः- गायत्री ॥  अन्वयः - मित्रमिव प्रियं प्रेष्ठं अतिथिं वेद्यं रथं न, अग्नेः वः स्तुषे ॥ शब्दार्थ- [हे मनुष्य!] (म…

अमर बलिदानी पं लेखराम

लेखक : डॉ बलविंदर शास्त्री दयानंद मठ दीनानगर अमर बलिदानी आर्य वीर श्री पंडित लेख राम जी ने अपने 39 वर्ष के…

स्वामी स्वतंत्रतानंद का जीवन और दर्शन

स्वामी स्वतंत्रतानंद का जीवन और दर्शन जन्म: स्वामी स्वतंत्रतानंद जी का जन्म पौष मास की पूर्णिमा सन 1877 ई. में हुआ। महर्षि दयानंद सरस्वती भी इसी सन् में प्रथम बार पंजाब के लुधियाना नगर में पधारे थे। उसी वर्ष लुधियाना से कुछ मील …

ईश्वर की सर्वव्यापकता का हमारी नैतिकता पर प्रभाव

• ईश्वर की सर्वव्यापकता का हमारी नैतिकता पर प्रभाव • महर्षि दयानंद जी ने ईश्वर के सर्वव्यापक स्वरूप को विशेष महत्त्व दिया है। उनके अनुसार, ईश्वर हर जगह मौजूद है और वह सभी आत्माओं और सभी भौतिक अस्तित्व में व्याप्त है। वह उन सभी क…

भारत के वीर सपूत सावरकर जी

इतिहास में छुपाया गया एक सच ....वीर सावरकर जी । 45 साल के महात्मा गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में बिता कर। इससे 4 साल पहले 28 वर्ष का एक युवक अंडमान में एक कालकोठरी में बन्द होता है। अंग्रेज उस…

छत्रपति वीर संभाजी महाराज

छत्रपति वीर संभाजी महाराज 11 मार्च को जिनका बलिदान हुआ था पढ़िए उनके रंगोटे खड़ी कर देने वाली जीवन गाथा वीर शिवाजी के पुत्र वीर शम्भा जी का जन्म 14 मई 1657 को हुआ था। आप वीर शिवाजी के साथ अल्पायु में औरंगजेब की कैद में आगरे के …

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